सेवरही/कुशीनगर।- देश में गरीबी और भूख के चलते हो रही मौतों पर सियासत भी सातवें आसमान पर पहुँच जाती है, सेमिनार, जागरूकता, गरीबों से हमदर्दी के नाम पर लाखों लाख रुपये पानी में बहा दिया जाता है, लेकिन सरकार द्वारा गरीबों के लिए भेजे जाने वाले राशन को जिम्मेदारों द्वारा सरेआम डकार लिया जा रहा उस पर अंकुश न लगाना एक लाइलाज बीमारी बन गया है।

उत्तर प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ राजनीति में आने के बाद जब सक्रिय हुए तो समाज के सबसे गरीब तबके को समाज के मुख्यधारा से जोड़ने के लिए उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और भूख को अहम समझा, उनके लिए आंदोलन करना हो या फिर प्रशासन को उसके जिम्मेदारी का एहसास करानी हो, वह सब किया। खासकर कुशीनगर जनपद के तमकुहीराज तहसील में भूख से हुई कई मौतों पर सियासत के कई तीर छोड़े। लेकिन आज वे खुद प्रदेश के रहनुमा है, जो व्यवस्था पहले थी आज उससे भी बदत्तर हो चली है, जिम्मेदार अपने जालसाज कोटेदारों के माध्यम से गरीबो के निवाले पर सरेआम डाका डाल रहें है। जनता सक्षम अधिकारियों से लगायत सरकार और शासन में बैठें लोगों को अपनी अर्जी भेजकर न्याय की गुहार लगा रहे है, लेकिन उनकी सुनने को कोई तैयार नहीं है।

दर्जन भर पीड़ितों ने तो यह भी आरोप लगाया कि हमने सरकार के पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराया था, हुआ कुछ नही लेकिन जब उसपर हुई कार्यवाही के लिए पुनः चेक कराया तो वहाँ जवाब में निस्तारण दिखाया गया मिला।
उधर तमकुहीराज तहसील की भौगोलिक स्थिति यह है कि उसका एक तिहाई हिस्सा जहाँ नारायणी नदी से प्रभावित है, वही दो दिशाएं बिहार प्रान्त से लगी है। यहां गरीबी और क्षेत्र का पिछड़ापन जिस तरह से मुँह वाये खड़ी है, वैसे ही सरकारी योजनाएं उनतक पहुचते पहुँचते समाप्त हो जाती है।
तमकुहीराज तहसील में तीन विकास खण्ड है, तमकुही, सेवरही, दुदही, जिसमे दुदही और सेवरही के अधिकांश हिस्सा नारायणी नदी के कहर का शिकार है, यानी फसल की उपज शून्य, फिर वहा के नागरिकों को राशन के नाम पर सरकारी राशन वरदान साबित होता है, लेकिन जिम्मेदार उसे भी डकारने में कोई कोर कसर नही छोड़ रहे।
यही स्थिति तमकुहीराज विकास खण्ड की भी है यहाँ नदी का कहर तो नही है, लेकिन मौसम की मार फसलों को नष्ट करने के लिए काफी है। यह पूरा क्षेत्र दैवीय आपदाओं के साथ ही गरीबों के निवाले पर डाका डालने वाले कुछ अधिकारियों का शिकार हो रहा है।
तहसील परिसर में पूर्ति विभाग का कार्यालय है तो जरूर, लेकिन यहाँ एकाध कोटेदार को छोड़कर दूसरा कोई नही मिलता। उनसे कुछ भी पूछने पर सीधा जवाब मिलता है, आप बाहर वाले दफ्तर में चले जाय। बाहर वाले दफ्तर पर सिर्फ काम की ही बात होती है। विभाग से सम्बंधित कोई भी जानकारी सरकारी/गोपनीय बताकर कुछ भी बताने से मना कर दिया जाता है।

उल्लेखनीय है कि तमकुहीराज तहसील क्षेत्र पुलिस चौकी समउर अन्तर्गत गंगुआ निवासी व पत्रकार योगेन्द्र वर्मा सहित तमाम पीडितो ने आरोप लगाया कि हमने तहसील दिवस से लगायत सरकार के पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराया था हुआ कुछ नही लेकिन जब उस पर हुई कार्रवाई के लिए पुनः चेक कराया तो वहां जबाब मे निस्तारण दिखाया गया मिला । तमकुहीराज तहसील मे गरीबी और पिछडापन जिस तरह से मुंह बाये खडी है वैसे ही सरकारी योजनाये उन तक पहुंचते पहुंचते समाप्त हो जाती है

सूत्रों की माने तो पूरे तहसील क्षेत्र में लगभग चार सौ के आसपास सरकारी राशन की दुकानें है, हर माह सैकड़ो की संख्या में शिकायते लेकर गरीब व मजदूर किस्म के लोग आते है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी जांच के बजाय शिकायतकर्ता को ही इतना दौड़ा देते है, की वह ईश्वर को हाथ जोड़कर अपने हाल पर रहने को विवश होकर वहां से चला जाता है। दूसरी ओर बड़े अधिकारियों से की गयी शिकायत भी उन्ही के पास आती है, जांच के नामपर खानापूर्ती करते हुए जिम्मेदार अधिकारियों को शिकायतकर्ता को गलत और गांव के राजनीति से प्रेरित बताकर अधिकारियों को गुमराह कर अपने द्वारा डकारे जा रहे गरीबों के निवाले पर पर्दा डाल दिया जाता है।
वैसे जो भी हो गरीबों को उनका हक दिलाने के मिशन को पूरा करने का वचन लेकर राजनीति में लम्बी छलांग लगाने वाले प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ से गरीबों को बहुत उम्मीद थी, उनकी इच्छा भी गरीबो को उनका निवाला उनतक पहुँचना मकसद भी है, लेकिन जिम्मेदार उन्हें भी .?

पूर्ति निरीक्षक तमकुहीराज रविन्द्र सिंह इसे सिरे से खारिज करते है, लेकिन वे भी मानते है कि कुछ कोटेदारों के चलते विभाग की बदनामी हो रही है।

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