माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक अब मनमानी नहीं कर पाएंगे। उन्हें अपनी हर घंटी पढ़ानी होगी। इसके लिए विद्यालयों की सभी कक्षाओं में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। उनकी निगरानी में ही कक्षाएं संचालित होंगी। माध्यमिक शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे जहां लापरवाह शिक्षकों की मनमानी पर लगाम लगेगी वहीं शिक्षा के स्तर में भी सुधार होगा।

कक्षा नौ से 12 तक की पढ़ाई की जिम्मेदारी माध्यमिक शिक्षा विभाग की है। इसके लिए राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त, मान्यता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। लेकिन इनमें से अधिकतर विद्यालय शिक्षा की गुणवत्ता को दरकिनार कर विद्यार्थियों से मनमाना शुल्क वसूल रहे हैं। वहीं राजकीय व शासकीय माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक सरकार से मोटी तनख्वाह तो लेते हैं लेकिन कक्षाओं में पढ़ाने नहीं जाते। विद्यालयों में पठन-पाठन की निगरानी के लिए प्रधानाचार्य के अलावा कोई सिस्टम नहीं होने से इन विद्यालयों में मनमानी का आलम है। इसका नतीजा बोर्ड परीक्षा में देखने को मिलता है। विद्यार्थी, विद्यालय व शिक्षक नकल के भरोसे हो जाते हैं।
इस बार बोर्ड परीक्षा में सख्ती के बाद जिले में करीब 10 हजार विद्यार्थियों ने परीक्षा छोड़ दी। नकल नहीं होने से यह आशंका जताई जा रही है कि परीक्षाफल में कहीं आधे से अधिक विद्यार्थी फेल न हो जाएं। वहीं विभाग का भी मानना है कि कई विद्यालयों में अध्यापक पढ़ाने ही नहीं जाते। इससे माध्यमिक विद्यालयों की शाख गिर रही है। लड़खड़ाती शिक्षा व्यवस्था को उबरने के लिए कक्षाओं में पठन पाठन की निगरानी के लिए तंत्र को मजबूत करने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत ही सभी माध्यमिक विद्यालयों की कक्षाओं में सीसीटीवी कैमरा लगाने का निर्णय किया गया है।
कैमरे की देखभाल के लिए बकायदा कंप्यूटर ऑपरेटर तैनात किए जाएंगे। कक्षाएं जब चलेंगी तब कैमरा ऑन रहेगा। इससे अध्यापकों की हाजिरी भी हो जाएगी। पता चल जाएगा कि अध्यापक विद्यालय पहुंचे हैं या नहीं।
माध्यमिक विद्यालयों के पठन पाठन को बेहतर बनाने के लिए योजना तैयार की गई है। विद्यालयों के सभी कक्षाओं में सीसीटीवी कैमरा लगवाकर कक्षा संचालन की मॉनीटरिंग की जाएगी। कैमरा प्रबंधतंत्र अपने स्रोत से खुद लगवाएंगे।

अशोक कुमार सिंह, डीआईओएस

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