इस बार भी कुशीनगर मे आग पर नियंत्रण के लिए मौजूदा संसाधनो का आभा

पडरौना,कुशीनगर : कुल जनसंख्या लगभग3.560.830 क्षेत्रफल 2873.5कि मी.२
(1.109.वर्ग मील) कुल ग्राम 1446
6 तहसील
खड्डा
पडरौना
कप्तानगंज
हाटा
कसया
तमकुही
14 विकासखण्ड  पडरौना, बिशुनपुरा, कुशीनगर, हाटा, मोतीचक, सेवरही, नेबुआ नौरंगिया, खड्डा, दुदही, फाजिल नगर, सुकरौली, कप्तानगंज, रामकोला और तमकुहीराज।
गर्मी के मौसम में आगलगी की घटना यहां हर साल व्यापक स्तर पर तबाही मचाती है। जबकी कुशीनगर मे संसाधनों की कमी के कारण आग की घटनाओं पर नियंत्रण काफी कठिन साबित होता है। आग से हर साल होने वाली इस तबाही पर हो-हल्ला तो मचता है, परंतु संसाधनों की व्यवस्था जस की तस बनी रहती है।
पिछले वर्षो में हुई आग की भारी तबाही को काबू करने में अब तक कोई ठोस कदम उठाने में प्रशासन विफल रहा है।इतने बड़े जनपद में सिर्फ तीन ही फायर स्टेशन है खड्डा पडरौना तमकुही वही हाटा में सीजनल यूनिट है जो 1 मार्च से 30जून तक काम करता है आग बुझाने के संसाधनों की भारी कमी से प्रतिवर्ष सैकड़ों हेक्टेयर फसलें जहां तबाह होती हैं, वहीं दर्जनों परिवार घर से बेघर होने को मजबूर होते हैं। इसका मुख्य कारण अग्निशमन के पास संसाधनों की कमी है। आगजनी की घटनाओं में समय से अग्नि शमन विभाग की सेवाएं न मिलने से ग्रामीणों को खामियाजा भुगतना पड़ता है।
जनपद का यह ऐसा क्षेत्र है, जहां प्रतिवर्ष आपदाओं का कहर बरसता है। पछुआ हवा क्षेत्रवासियों के लिए तबाही लेकर आती है। हालांकि खड्डा व हमुमानगंज क्षेत्र में आगजनी के अलावा बाढ़ आपदा की दोहरी मार झेलनी पड़ती है। अप्रैल व मई माह आग की घटनाओं के लिए प्रसिद्ध हो चुका है। तेज हवा के चलते एक चिंगारी से सैकड़ों बीघा फसल जलकर राख हो जाती है। यही नहीं झोपड़ी में रहने वाले गरीब परिवार भी इस आग की विनाश लीला से नहीं बच पाते। अग्निशमन विभाग आग की घटनाओं पर काबू करने के जो इंतजाम किये वह आगे चलकर नाकाफी सिद्ध हो सकती है । थानों व तहसील पर तैनात कर्मी व संसाधनों की भारी कमी है। जनपद में जहां आगजनी की सबसे ज्यादा घटनाएं घटित होती हैं, लेकिन तबाही के प्रति विभाग संवेदनशील नहीं बन पाया। परिणामस्वरूप जनपपद मे दो दर्जन से अधिक स्थानों पर फसलें राख हुई वहीं सौ से अधिक परिवार घर से बेघर हुए। तहसील मुख्यालयों पर मौजूद संसाधन जब तक घटनास्थल पर पहुंचते हैं तब तक आग से तबाही मच जाती है। पडरौना तहसील मुख्यालय पर सिर्फ एक ही बडी दमकल नियमित रूप से तैनात किया गया है। संसाधनों की कमी की बात अग्नि शमन मे तैनात कर्मचारी भी स्वीकारते हैं। उन्होंने बताया कि मौजूदा संसाधनों के बल पर आगजनी की घटनाओं पर काबू पाने का पूरा प्रयास किया जाता है। आग पर काबू पाने के लिए तमकुही में एक टैंकर, खड्डा में एक सदर में
एक -एक टैंकर तैनात हैं। दो बुलेरो पिकप इसके अलावा जिले में 53 फायरमैन के जहग महज 37 तैनात हैं।16 फायरमैन की आवश्यकता है फायरमैन के अभाव में होमगार्ड से चलाया जाता है काम हालाकी पडरौना शहर के कोतवाली के बगल मे रहने वाला यह बिभाग अब जिला मुख्यालय पर फायर स्टेशन की भूमिका मे काम कर रहा है । इतना ही नही फायर स्टेशन से दमकलो मे पानी भरने का भी कोई इंतजाम नही है जिला मुख्यालय पर निर्माण होने के बाबूजुद यह बिभाग बिभिन्न समस्याओं का दंश झेल आग पर काबू पाने का प्रयास करता रहता है । इस बाबत जब जिला अग्निशमन अधिकारी राधेश्याम शरण सिंह से बात हुई तो उन्होंने बताया कि वर्तमान मे संसाधनों की कमी है जिसके लिए शाशन स्तर पे कई बार
इसको भेजा गया है लेकिन अबतक कोई पहल नहीं हुई बाकी के तीन तहसील कप्तानगंज हटा कसया में जमीन मिल गयी है शासन से धन अवमुक्त हो जाए तो कार्य सुरु
हो
उन्होंने बताया कि आग लगने के तीन प्रमुख कारण है जिसमें अगर सावधानी बरती जाए तो आगलगी की घटनाओं पे काबू हो सकता है
1 जर्जर हाई टेंसन तार
2 खेतो में जलाए जाने वाले डंठल
3 समय से भोजन बनाना व भोजन बनाते समय चूल्हे के पास पानी रखे खाद गड्ढे में अधबुझि राख न फेके

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